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7/11 मुंबई धमाके केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 मुस्लिम आरोपियों को 18 साल बाद किया बरी

7/11 मुंबई बम धमाके केस में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 18 साल बाद सभी 12 मुस्लिम आरोपी बरी

7/11 मुंबई धमाके हाईकोर्ट फैसला

मुंबई: 7 जुलाई 2006 को मुंबई लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के 18 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 12 मुस्लिम आरोपियों को बरी कर दिया है। जस्टिस अनिल किलोर और श्याम चांडक की खंडपीठ ने राज्य सरकार और दोषियों की अपीलों पर 6 महीने तक सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत देने में विफल रहा और गवाहों की गवाही अविश्वसनीय थी।

🚆 क्या हुआ था 7/11 को?

11 जुलाई 2006 को शाम के व्यस्त समय में मुंबई की सात लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 189 लोगों की जान गई और 800 से ज्यादा घायल हुए। यह भारत के इतिहास की सबसे भीषण आतंकी घटनाओं में से एक था।

⚖️ कोर्ट का फैसला और कारण

  • कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के अधिकांश गवाहों की गवाही को अविश्वसनीय माना।
  • कोर्ट ने कहा कि धमाके के 100 दिन बाद टैक्सी ड्राइवर और रेलयात्रियों द्वारा पहचान कर पाना अविश्वसनीय है।
  • बम और नक्शों की बरामदगी का कोई ठोस संबंध स्थापित नहीं किया जा सका।
  • अभियोजन पक्ष यह तक साबित नहीं कर सका कि धमाकों में किस प्रकार के बम का इस्तेमाल हुआ था।

👨‍⚖️ जिन पर थी सजा

2015 में मौत की सजा पाए आरोपी:

  • कमाल अंसारी
  • मोहम्मद फैसल अताउर रहमान शेख
  • एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी
  • नवीद हुसैन खान
  • आसिफ खान

उम्रकैद की सजा पाने वाले अन्य 7 आरोपी:

  • तनवीर अहमद
  • मोहम्मद इब्राहिम अंसारी
  • मोहम्मद मजीद मोहम्मद शफी
  • शेख मोहम्मद अली आलम शेख
  • मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी
  • मुजम्मिल अताउर रहमान शेख
  • सुहैल महमूद शेख
  • ज़मीर अहमद लतीउर रहमान शेख

🕊️ 18 साल बाद रिहाई: न्याय या देरी?

इन सभी आरोपियों ने बीते 18 साल जेल में बिताए। इस दौरान उन्होंने अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ी। अब कोर्ट के इस फैसले ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या यह न्याय है जो बहुत देर से आया?

📜 निष्कर्ष

यह फैसला भारत की न्याय प्रणाली के लिए एक उदाहरण है कि कैसे सबूतों और निष्पक्ष सुनवाई के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट करता है कि आतंकवाद जैसे मामलों में सही जांच और प्रमाण कितने आवश्यक हैं, ताकि निर्दोष को सजा ना मिले और दोषी छूट ना पाए।


⚠️ नोट: यह रिपोर्ट न्यायिक फैसले और कोर्ट रिकॉर्ड पर आधारित है। यदि किसी जानकारी में संशोधन या सुधार की आवश्यकता हो, तो कृपया हमें सूचित करें।

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